Tuesday, 22 March 2016

"शिकायतों की करवटें"

लेहरों का साहिल से मिलना,
किसी का मन घबराया,
लहरों में देखा जब आक्रोश,
शांति पाठ सुनाया,
ॐ का उच्चारण किया,
प्यार-गुस्सा दोनों तरह समझाया,
क्यों इतना शोर?
जहाँ एक दिल दूजे का चोर,
साहिल - जहाँ दो दिल का हो मिलान,
कैसे करेगा कोई ये शोर सहन?
दो दिलों को तूने खूब डराया,
ऐ सागर, ये तूने क्या किया?

सागर मंद-मंद मुस्कुराया,
भला ऐसा मैंने क्या किया,
जो तू मुझसे खफा हुआ,
कितने बरस बाद आज मैं साहिल से मिला,
कितने इंतज़ार मैंने किया,
उसका तो तूने हिसाब भी न किया,
तुझे रेरा दिल दिखा,
हमसफ़र का  दिल दिखा,
प्यार तूने उससे किया,
गिला-शिकवा तूने सब मुझसे किया,
तनिक सोच क बता?
जब मैं अपनी मंज़िल से मिला,
तब तूने क्या किया?
उस कोमल दिल को किया तूने करीब,
जो था कुछ फासलों से दूर,
जहाँ तुम दो दिलों का मिलन कोमलता से हुआ,
या फिर किसी घबराहट वश हुआ,
वहीं मेरा मिलान हंगामें में हुआ,
जश्न हमने मनाया,
उस लम्हे में - जिसका हमने बरसों से इंतज़ार किया,
तू जानता नहीं, चलते-चलते थका-टूटा मैं,
कितनी मुश्किलों को पार किया,
उमीदें को मैंने खोया,
तेरे जैसों को याद कर दिल को समझाया,
इतने बरस बाद आज मैं घर आया,
ऐ मुसाफिर, बता मैंने क्या गलत किया?

लहरों का साहिल से मिलना,
अब किसी का दिल मुस्कुराया,
किसी की आँखों से प्यार बरसाया,
ऐ सागर, छोटा था मेरा दायरा,
तेरी बदौलत विशाल हुआ आज मेरा दायरा,
माफ़ करना फकीरा को ऐ दोस्त,
गिला-शिकवा मैंने किया बहुत,
तू सागर है - प्यार का सन्देश,
तेरी मंज़िल, तेरा साहिल - मिलन का है सन्देश ||